सूर्य का अन्य राशि में प्रवेश होनेवाले पर्व को संक्रांति कहा जाता है| पहले दिन भोगी तो दूसरे दिन संक्रांति मनाई जाती है |
दक्षिण भारत में इस त्योहार को अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. उत्तर भारत में इसे खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है और कर्नाटक में भोगी के तौर पर | तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसे संक्रांति कहा जाता है. तमिलनाडु में इस त्यौहार को पोंगल कहते हैं. संक्रांति अर्थात सूरज का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना….

सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की प्रक्रिया को पोंगल अर्थात भोगी पांडिगई कहते हैं| इसी प्रक्रिया को संक्रांति भी कहा जाता है| हर साल जब सूर्य उत्तरायण होता है तब यह त्यौहार 4 दिनों तक मनाया जाता है.मकर संक्रांति और लोहड़ी की तरह भोगी पांडीगई भी मुख्य रूप से खेती और फसलों से जुड़े त्यौहार है| भोगी पंडीगई का त्यौहार आस्था और संपन्नता के लिए मनाया जाता है| पहले दिन भोगी , दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन को कन्या पोंगल कहा जाता है| बारिश और अच्छी फसल के भी इंद्रेदेव का पूजन किया जाता है| घर के सभी सदस्य बाजारी से बनीं रोटी , विभिन्न सब्जी , मीठा व्यंजन आदि लेकर किसी पर्यटन स्थल या खेतीबाड़ी में जाकर भोजन करते है | और दूसरे दिन संक्रांति मनाकर तिलगुल बांटकर एक दूसरे को शुभकामनयें देते है |


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